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विज्ञापनो की मम्मी कितनी अच्छी होती है…

सुष्मिता ने अपनी सहेली की मृत्यु का दुख व्यक्त करते हुए अपनी सहेली के पति से कहा – जबसे रानी की मृत्यु हुई है, मेरा तो दिल नहीं लगता | आप उसकी अंतिम निशानी मुझे दे दीजिए, उसे ही सीने से लगाकर मन बहला लिया करूंगी वरना मैं तो पागल हो जाऊंगी |

रानी के पति ने झट से जवाब दिया – रानी की अंतिम निशानी तो मैं ही हूं |

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विज्ञापनो की मम्मी कितनी अच्छी होती है.

बच्चे कपड़े गंदे करके आए तो भी हँस के धोती है.

बचपन में जब हम कपडे गंदे कर के आते थे,

तो पहले हम धुलते थे,
बाद में कपड़े!!

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पत्नियाँ चाहे 95 मिनट तक
अपनी मम्मी से बात कर लें

लेकिन अंत मे एक बात ज़रूर बोलती हैं,
“ठीक है मम्मी …. फ़्री होकर बात करती हुँ”

और उनकी माँ सोचती हैं
“पता नहीं बेटी को कितना काम करना पड़ता है,

बेचारी 2 मिनट भी चैन से बात नहीं कर पाती”!!

अपने चारो बच्चो को अनाथालय में भिजवा दूंगा …

भीख मांगने के लिए दफ्तर खोलूं…

बताओ मेरी उम्र कितनी है?

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